भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और संबंधित मानवाधिकार खतरे में- अमेरिकी आयोग

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USCIRF Report On Religious Freedom: यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने आरोप लगाया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता (Religious Freedom) और संबंधित मानवाधिकार लगातार खतरे में है. पैनल ने इस साल की शुरुआत में अपनी सिफारिशों को दोहराते हुए कहा कि अमेरिका को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन में शामिल होने या सहन करने के लिए भारत को “विशेष चिंता का देश” की लिस्ट में शामिल करना चाहिए. 

पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2022 में राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर सरकारों ने उन नीतियों को बढ़ावा दिया, जो धर्म परिवर्तन, अंतर-धार्मिक संबंधों और गोहत्या को टारगेट करती हैं. जिन्होंने मुस्लिम, ईसाई, सिख, दलित और आदिवासियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया. राष्ट्रीय सरकार ने इस दौरान आलोचकों की आवज को दबाना जारी रखा. इसने यूएपीए और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के इस्तेमाल का हवाला देते हुए महत्वपूर्ण आवाजों विशेष रूप से धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनकी ओर से वकालत करने वालों को दबाना जारी रखा. 

बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकारों पर लगाया ये आरोप

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बीजेपी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार और नेताओं ने राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर सांप्रदायिक नीतियों की वकालत की है. भारत को एक खुले हिंदू राज्य के रूप में स्थापित करने की मांग की गई, जो भारत के धर्मनिरपेक्ष नींव के विपरीत है और भारत के धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए गंभीर खतरा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी अधिकारी और गैर-सरकारी तत्वों ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा और दुष्प्रचार फैलाने के लिए सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों का उपयोग करना जारी रखा. 

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हिजाब और CAA को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा?

आयोग ने कर्नाटक सरकार द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध और मामले पर विरोध का भी उल्लेख किया. इसमें कहा गया है कि प्रतिबंध को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले से धार्मिक तनाव और गहराने की संभावना है. इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) ने जातीय असमिया हिंदुओं और बंगाली मूल के मुसलमानों के बीच तनाव बढ़ा दिया है. 

भारत ने की थी कड़ी आलोचना

भारत ने जुलाई में आयोग के अप्रैल में किए गए निष्कर्षों को पक्षपाती और गलत बताते हुए खारिज कर दिया था. विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ये टिप्पणियां भारत और इसके संवैधानिक ढांचे, इसकी बहुलता और इसके लोकतांत्रिक व्यवस्था की समझ की भारी कमी को दर्शाती हैं. अफसोस की बात है कि USCIRF अपने प्रेरित एजेंडे के तहत अपने बयानों और रिपोर्टों में तथ्यों को बार-बार गलत तरीके से पेश करना जारी रखता है.

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